Description
दोस्तों, आखिर कब तक मन को समझाते रहेंगे कि गौरेया लौट आओ…यह आंगन तुम बिन सूने हैं, सूखे हैं हमारे मन और ये जीवन। सच तो यह है कि गौरेया अब भी बसती है लेकिन चहचहाहट सुनाई नहीं देती, केवल महसूस होती है। हमारे भावों, यादों और अहसासों में गौरेया अब भी है और यदि उसके लिए बेहतर प्राकृतिक माहौल नहीं बनाया गया तो एक दिन यादों और भावों से फुर्र होकर वह चित्रों में खो जाएगी ।
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BALA DATT –
Excellent