Description
अपनी बात आरंभ करने से पहले मैं जलपुरुष आदरणीय राजेंद्र सिंह जी के एक कथन को दोहराना चाहता हूं। वह कहते हैं कि पानी की मिठास पर हमारी संस्कृति और सभ्यता की मिठास भी निर्भर है जिन हिस्सों में पानी खारा हो गया या सूख गया वहां सभ्यता और संस्कृति भी खारी हो जाती है, सूख जाती है। हमें यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि जल हमारे जीवन, व्यवहार, आचार और विचार सभी पर गहरा प्रभाव छोड़ता है।





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