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वह समय हममें से हरेक को याद है, नई पीढ़ी की बात तो कहना बेमानी है लेकिन पुरानी पीढ़ी जानती है कि एक सप्ताह की बारिश की वो झड़ी क्या थी, उसकी तासीर क्या थी और उसकी रूमानियत क्या थी ? ओह काश वह समय लौट आता, काश वह झड़ी लौट आती, काश वह अनुभव जो अब सूखकर यादों की दरारों में समा चुके हैं दोबारा हरे हो उठते….। आज की पीढ़ी ने क्या देखा है और क्या देख रही है और कल क्या देखेगी…?
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