Description
महान संस्कृतियों का जन्म नदियों के किनारे ही हुआ है, लेकिन वह खूब फलीभूत हुईं और आज तक उन्हें उनके आधारभूत बसाहट के लिए जाना जाता है। नदी कभी भी हमारे रास्ते में नहीं आती है, हम उसके रास्ते में पहुंच जाते हैं, हमारी नगरीय बसाहट पर हमें दोबारा विचार और मंथन करने की आवश्यकता है कि क्या वह नदियों के रास्ते में या आसपास बहुत करीब हैं या फिर हमारी आंतरिक बसाहट में कहीं कोई अवरोध तो नहीं है? बाढ़ देश में विकराल होती जा रही है, बहुत से हिस्से हैं जो प्रतिवर्ष बाढ़ से प्रभावित होते हैं, जन और धन हानि का यह क्रम थम नहीं रहा है, इसे क्या रोका जा सकता है…और कैसे…?
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