Description
यह दौर बहुत सख्त और क्रूर है क्योंकि इसने हमसे हमारे अपने चेहते और प्रकृति पुत्र आदरणीय सुंदरलाल बहुगुणा जी को छीन लिया है, आपका जाना गहरी क्षति है, लेकिन उन्होंने जो रास्ते दिखाए हैं उन पर चलकर हम इतना तो कर ही सकते हैं कि इस धरा को संवार लें जैसा कि बहुगुणा जी चाहते थे, हम उनके सपनों की प्रकृति तैयार कर सकते हैं, करेंगे और अवश्य करेंगे…यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी…? दोस्तों यह अंक दो हिस्सों में विभाजित किया गया है, पहला हिस्सा प्रकृति पुत्र पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा जी पर केंद्रित है।
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