Description
अब तक हमने धर्म की नजर से प्रकृति को खूब देखा है, इस आशय से इसे देखा जाए संभवतः इसके मूल में प्रकृति संरक्षण ही रहा होगा, लेकिन अब तक की प्रकृति की स्थितियों का आकलन करें तो पाएंगे कि हमें नजरिया बदलना होगा। अब हम प्रकृति संरक्षण को धर्म मानकर उसे संवारने में जुट जाएं, प्रकृति को अपना मूल कर्तव्य, अपनी प्रार्थना, अपना कर्म, अपना संकल्प सभी स्वतः ही स्वीकार कर लें।
Latest posts by BALA DATT SHARMA (see all)





Reviews
There are no reviews yet.