International E-Waste Day (अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस) हर वर्ष 14 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे यानी E-Waste के तेजी से बढ़ते संकट के प्रति दुनिया को जागरूक करना और पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सही तरीके से संग्रहित, पुन: उपयोग और रिसाइकिल करने के लिए प्रेरित करना है। इस दिवस की शुरुआत 2018 में WEEE Forum ने की थी। 2026 में इसका नौवां संस्करण आयोजित किया जा रहा है और इस वर्ष का फोकस “Fast Tech” यानी कम कीमत वाले छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के तेजी से खरीदने और फेंकने की बढ़ती प्रवृत्ति पर है।
संयुक्त राष्ट्र के Global E-waste Monitor 2024 के अनुसार 2022 में दुनिया ने रिकॉर्ड 62 मिलियन टन ई-कचरा पैदा किया। इसका केवल 22.3 प्रतिशत हिस्सा ही आधिकारिक रूप से संग्रहित और रिसाइकिल किया गया। यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रहती है तो 2030 तक ई-कचरा बढ़कर लगभग 82 मिलियन टन हो सकता है।

International E-Waste Day (अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस)
अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस कब मनाया जाता है?
हर वर्ष 14 अक्टूबर को International E-Waste Day मनाया जाता है। यह कोई संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित पारंपरिक अंतर्राष्ट्रीय दिवस नहीं, बल्कि WEEE Forum और उसके सदस्य संगठनों की वैश्विक जागरूकता पहल है।
2026 में इसका नौवां संस्करण है और अभियान का मुख्य संदेश है:
“Fast Tech: Don’t bin it, bring it!”
इसका अर्थ है कि छोटे और सस्ते इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कूड़ेदान में डालने के बजाय अधिकृत संग्रह केंद्र या रिसाइक्लिंग व्यवस्था तक पहुंचाया जाए।
अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस कब शुरू हुआ?
International E-Waste Day की शुरुआत 2018 में WEEE Forum ने की थी। इसका मूल उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि ऐसा हर उपकरण जिसमें plug, battery या cable है और जो उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है, वह संभावित रूप से e-waste है।
समय के साथ यह अभियान केवल जागरूकता दिवस नहीं रहा, बल्कि circular economy, repair, reuse, producer responsibility और responsible recycling से जुड़ा वैश्विक अभियान बन गया है।
2025 में 50 देशों और छह महाद्वीपों से 140 से अधिक संगठनों ने इस अभियान में भाग लिया था।
दुनिया में ई-कचरा कितना बड़ा संकट बन रहा है?
ई-कचरे की मात्रा दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले waste streams में से एक है।
Global E-waste Monitor 2024 के अनुसार:
| प्रमुख तथ्य | वैश्विक स्थिति |
| 2022 में ई-कचरा | 62 मिलियन टन |
| 2010 से वृद्धि | लगभग 82% |
| 2022 में औपचारिक रूप से संग्रह/रिसाइकिल | 22.3% |
| 2022 में ठीक से रिसाइकिल न हुआ | लगभग 77.7% |
| 2030 का अनुमान | 82 मिलियन टन |
| 2022 में ई-कचरे में धातुएं | लगभग 31 मिलियन टन |
| ई-कचरे में प्लास्टिक | लगभग 17 मिलियन टन |
| 2022 में बरामद न हो सके संसाधनों का मूल्य | लगभग US$62 अरब |
यह समस्या इसलिए गंभीर है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक कचरे में एक तरफ सोना, तांबा, चांदी और अन्य मूल्यवान सामग्री होती है, तो दूसरी तरफ कुछ उपकरणों में पारा और अन्य खतरनाक पदार्थ भी मौजूद हो सकते हैं।
अर्थात ई-कचरा केवल कचरा नहीं है। यह प्रदूषण और संसाधन दोनों का संकट है।
ई-कचरे का सबसे अधिक प्रभाव प्रकृति के किस हिस्से में हो रहा है?
ई-कचरे का प्रभाव केवल जमीन तक सीमित नहीं है। गलत तरीके से निपटाए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिट्टी, भूजल, नदियों, वायु और स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
जब ई-कचरे को खुले में जलाया जाता है या अनियंत्रित तरीके से तोड़ा जाता है, तो प्रदूषक आसपास के पर्यावरण में पहुंच सकते हैं। अनौपचारिक और असुरक्षित recycling में काम करने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी जोखिम पैदा हो सकता है।
Global E-waste Monitor के अनुसार 2022 में लगभग 18 मिलियन टन ई-कचरा ऐसे निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में मुख्यतः informal sector द्वारा संभाला गया, जहां पर्याप्त e-waste management infrastructure नहीं था।
इसलिए ई-कचरे की समस्या को पर्यावरण + स्वास्थ्य + संसाधन तीनों के नजरिए से देखना आवश्यक है।
क्या ई-कचरा जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों को भी प्रभावित करता है?
हां। ई-कचरे में मौजूद धातुओं को दोबारा प्राप्त करने से नए खनन की आवश्यकता कम की जा सकती है।
Global E-waste Monitor के अनुसार 2022 में औपचारिक ई-कचरा प्रबंधन से अनुमानित 93 मिलियन टन CO₂-equivalent emissions से बचाव हुआ। इसमें refrigerants की recovery और नए धातु खनन से बचने का योगदान शामिल था।
इसलिए recycling का लाभ केवल कचरा कम करना नहीं है। यह खनन, ऊर्जा खपत और greenhouse-gas emissions को भी कम करने में मदद कर सकता है।
2026 में International E-Waste Day का फोकस क्या है?
2026 में अभियान का फोकस “Fast Tech” है।
Fast Tech में ऐसे छोटे और कम कीमत वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हैं जिन्हें लोग आसानी से खरीद लेते हैं और बहुत कम समय बाद फेंक देते हैं। इनमें:
- earphones
- charging cables
- USB adapters
- छोटे electronic toys
- LED lights
- mini fans
- छोटे gadgets
- batteries
- कुछ disposable electronic products
जैसी वस्तुएं शामिल हो सकती हैं।
समस्या यह है कि इन वस्तुओं को लोग अक्सर बहुत छोटा या सस्ता समझकर सामान्य कचरे में डाल देते हैं। लेकिन हर छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी सही end-of-life treatment की मांग करता है।
दुनिया ई-कचरे को रोकने के लिए क्या प्रयास कर रही है?
दुनिया में e-waste management के लिए कई स्तरों पर काम हो रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं:
Extended Producer Responsibility (EPR):
उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ाना ताकि उपकरणों के उपयोग के बाद उनके संग्रह और recycling की व्यवस्था भी मजबूत हो।
Repair और reuse:
उपकरण खराब होने पर तुरंत नया खरीदने के बजाय repair और refurbishment को बढ़ावा देना।
Formal recycling:
ई-कचरे को अनधिकृत कबाड़ चैनल में जाने से रोककर अधिकृत recycling facilities तक पहुंचाना।
Circular economy:
पुराने उपकरणों से उपयोगी materials वापस प्राप्त करके उन्हें नए उत्पादों में इस्तेमाल करना।
Global E-waste Monitor के अनुसार 2023 तक 81 देशों में e-waste legislation मौजूद थी और 67 देशों में Extended Producer Responsibility से संबंधित प्रावधान थे। हालांकि केवल 46 देशों के पास collection targets और 36 के पास recycling targets थे।
इससे पता चलता है कि कानून बढ़ रहे हैं, लेकिन उनके प्रभावी implementation में अभी बड़ी कमी है।
ई-कचरा भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण मुद्दा है?
भारत में तेजी से बढ़ती digital economy, smartphones, computers, televisions, appliances, batteries और electronic equipment की खपत के साथ e-waste management का महत्व बढ़ रहा है।
भारत में समाधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा EPR, authorized collection, formal recycling और consumer awareness है। केवल recycling plant बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। उपभोक्ता को यह भी पता होना चाहिए कि पुराने मोबाइल, लैपटॉप, chargers, batteries और अन्य electronic products कहां जमा करने हैं।
2026 में भारत में International E-Waste Day के अवसर पर विभिन्न संगठनों द्वारा collection drives, awareness campaigns, webinars और campus programmes आयोजित किए जा रहे हैं। WEEE Forum की 2026 गतिविधियों की सूची में भारत के लिए ऐसे कई कार्यक्रम दर्ज हैं।
यदि सुधार नहीं हुए तो अगले 20 वर्षों में दुनिया कहां पहुंच सकती है?
2030 तक ई-कचरा 82 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान पहले ही सामने आ चुका है।
यदि इसके बाद भी consumption तेजी से बढ़ता रहा और collection तथा recycling infrastructure उसी गति से नहीं बढ़ा, तो 2040–2045 तक दुनिया को कई जुड़े हुए संकटों का सामना करना पड़ सकता है।
सबसे संभावित चुनौतियां होंगी:
पहली—कचरे की मात्रा में भारी वृद्धि।
छोटे gadgets, batteries, solar panels, electric mobility और connected devices के बढ़ने से waste streams और जटिल होंगे।
दूसरी—महत्वपूर्ण खनिजों पर दबाव।
ई-कचरे में मौजूद copper, gold, aluminium और critical materials को recover नहीं किया गया तो नए mining pressure बढ़ेंगे।
तीसरी—प्रदूषण का खतरा।
अनियंत्रित disposal और informal processing से soil, water और air pollution का जोखिम बढ़ सकता है।
चौथी—स्वास्थ्य संबंधी जोखिम।
असुरक्षित recycling में काम करने वाले श्रमिक और आसपास के समुदाय अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
पांचवीं—जलवायु प्रभाव।
नए metals और materials के लिए अधिक mining और processing की आवश्यकता carbon emissions बढ़ा सकती है।
इसलिए अगले 20 वर्षों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि दुनिया “Use → Throw” मॉडल से “Repair → Reuse → Recover → Recycle” मॉडल की ओर कितनी तेजी से बढ़ती है।
ई-कचरे को कम करने के लिए आम नागरिक क्या कर सकता है?
हर व्यक्ति पांच आसान कदम अपना सकता है:
- जरूरत न होने पर नया electronic product न खरीदें।
- पुराने उपकरणों को repair करके उनकी life बढ़ाएं।
- काम करने वाले पुराने उपकरण donate या reuse करें।
- batteries और electronic items को सामान्य कचरे में न डालें।
- उन्हें अधिकृत e-waste collection या recycling channel में दें।
2026 के International E-Waste Day अभियान का मूल संदेश भी यही है—छोटे electronic items को सामान्य कूड़ेदान में नहीं, उचित collection system में पहुंचाएं।
Summary
International E-Waste Day (अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस) हर वर्ष 14 अक्टूबर को दुनिया को एक ऐसे संकट के बारे में जागरूक करता है जो डिजिटल विकास के साथ तेजी से बढ़ रहा है।
2022 में दुनिया ने 62 मिलियन टन e-waste पैदा किया और केवल 22.3% को औपचारिक रूप से collect और recycle किया गया। यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो 2030 में यह मात्रा लगभग 82 मिलियन टन हो सकती है।
2026 का “Fast Tech” अभियान विशेष रूप से छोटे और सस्ते electronic products पर ध्यान दिलाता है, जिन्हें लोग अक्सर सामान्य कचरे में डाल देते हैं।
अगले 20 वर्षों में दुनिया के सामने चुनौती केवल ज्यादा कचरे की नहीं होगी। यह प्राकृतिक संसाधनों, खनन, प्रदूषण, मानव स्वास्थ्य और circular economy की चुनौती भी होगी। इसका समाधान अधिक खरीदना नहीं, बल्कि कम खरीदना, लंबे समय तक इस्तेमाल करना, repair करना, reuse करना और जिम्मेदारी से recycle करना है।
FAQ: International E-Waste Day
1. International E-Waste Day कब मनाया जाता है?
हर वर्ष 14 अक्टूबर को International E-Waste Day मनाया जाता है।
2. International E-Waste Day की शुरुआत कब हुई?
इस दिवस की शुरुआत 2018 में WEEE Forum ने की थी।
3. 2026 में International E-Waste Day की थीम क्या है?
2026 की थीम “Fast Tech: Don’t bin it, bring it!” है।
4. दुनिया में हर साल कितना ई-कचरा पैदा हो रहा है?
Global E-waste Monitor 2024 के अनुसार 2022 में दुनिया में 62 मिलियन टन ई-कचरा पैदा हुआ था।
5. 2030 तक ई-कचरा कितना हो सकता है?
वर्तमान प्रवृत्तियों के आधार पर 2030 तक वैश्विक e-waste लगभग 82 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है।
6. ई-कचरा प्रकृति के लिए खतरनाक क्यों है?
गलत तरीके से निपटाए गए e-waste से मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषण का जोखिम बढ़ सकता है।
साथ ही इसमें मौजूद मूल्यवान metals के नष्ट होने से नए खनन का दबाव बढ़ता है।
7. ई-कचरे को कम करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
उपकरणों का जीवन बढ़ाना, repair और reuse को प्राथमिकता देना तथा अंत में उन्हें
अधिकृत collection और recycling व्यवस्था में देना सबसे प्रभावी उपायों में शामिल हैं।
References
- United Nations Institute for Training and Research (UNITAR) — Global E-waste Monitor 2024.
- WEEE Forum — International E-Waste Day 2026: Fast Tech.
- WEEE Forum — International E-Waste Day background and history.
- WEEE Forum — India: International E-Waste Day 2026 activities.
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और विश्वसनीय संस्थागत स्रोतों के आधार पर सामान्य जानकारी
और पर्यावरण जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ई-कचरे की मात्रा,
recycling rates और भविष्य के अनुमान नई रिपोर्टों तथा बदलती consumption patterns के अनुसार संशोधित हो सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निपटान के लिए अपने क्षेत्र में
लागू स्थानीय नियमों और अधिकृत collection/recycling व्यवस्था का पालन करें।
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