Description
जिन्होंने बारिश वाला वह बचपन जीया है, जिन्होंने बूंदों की निर्मलता को हथेली पर महसूस किया है जिन्होंने झूले देखे हैं जिन्होंने सावन भी देखे और बारिश के उस दौर में कर्णप्रिय गीत भी सुने हैं। अहा कैसा अनूठा रिश्ता था बारिश से। एक पूरी की पूरी उम्र बीत जाने के बाद भी बारिश की वह गहरे तक छू लेने वाली शीतलता महसूस होती है क्योंकि उस दौर में हम प्रकृति के साझीदार थे, उसे महसूस करते थे, जीते थे, उसके उत्सव मनाते थे और आनंदित हो उठते थे। अब बारिश को उत्सव नहीं आफत कहा जाने लगा है।
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