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Antarctica's Doomsday Thwaites 2026

Antarctica’s Doomsday Thwaites 2026: थ्वाइट्स ग्लेशियर का खतरा और नया शोध

अंटार्कटिका का थ्वाइट्स ग्लेशियर (Thwaites Glacier) दुनिया के सबसे अधिक अध्ययन किए जा रहे ग्लेशियरों में से एक है। इसे अक्सर “डूम्सडे ग्लेशियर” कहा जाता है, क्योंकि इसके पीछे हटने और संभावित अस्थिरता का वैश्विक समुद्र-स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यह पश्चिमी अंटार्कटिका में स्थित है, जहां समुद्र का अपेक्षाकृत गर्म पानी ग्लेशियर के निचले हिस्से को पिघलाने में भूमिका निभाता है। Antarctica’s ‘Doomsday’ Thwaites

अक्टूबर 2026 में प्रकाशित नए शोधों ने इसके भविष्य के अनुमानों को और महत्वपूर्ण बना दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्लेशियर का पूरा ढहना निकट भविष्य में निश्चित नहीं है, लेकिन इसकी बर्फ का नुकसान आने वाले दशकों और सदियों में समुद्र-स्तर बढ़ाने में योगदान दे सकता है।

1. Antarctica’s ‘Doomsday’ Thwaites (अंटार्कटिका के ‘डूम्सडे’ थ्वाइट्स) क्या है?

प्रश्न: थ्वाइट्स ग्लेशियर को डूम्सडे ग्लेशियर क्यों कहा जाता है?

उत्तर: थ्वाइट्स अंटार्कटिका का विशाल ग्लेशियर है, जो जमीन पर मौजूद बर्फ को समुद्र की ओर पहुंचाता है। इसके पीछे हटने से समुद्र में जाने वाली बर्फ की मात्रा बढ़ सकती है। साथ ही, इसके आसपास की बर्फ की चादर की स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।

“डूम्सडे ग्लेशियर” इसका लोकप्रिय नाम है, कोई औपचारिक वैज्ञानिक वर्गीकरण नहीं। इसका मतलब यह नहीं कि ग्लेशियर किसी निश्चित तारीख पर अचानक टूटकर दुनिया को डुबो देगा।

2. थ्वाइट्स ग्लेशियर कहां स्थित है और वहां की भौगोलिक परिस्थितियां कैसी हैं?

प्रश्न: थ्वाइट्स ग्लेशियर की भौगोलिक स्थिति इसे संवेदनशील क्यों बनाती है?

उत्तर: यह पश्चिमी अंटार्कटिका के अमुंडसेन सागर (Amundsen Sea) क्षेत्र में स्थित है। यहां बर्फ समुद्र की ओर बहती है और कुछ हिस्सों में ग्लेशियर समुद्र के पानी के ऊपर तैरती बर्फ की शेल्फ से जुड़ा है।

ग्लेशियर के नीचे की भूमि कई स्थानों पर समुद्र तल से नीचे है। ऐसे भूभाग में समुद्री पानी बर्फ के नीचे भीतर तक पहुंच सकता है। अपेक्षाकृत गर्म समुद्री पानी बर्फ के निचले हिस्से को पिघलाता है, जिससे ग्लेशियर का जमीन से जुड़ा क्षेत्र पीछे हट सकता है। यही प्रक्रिया इसकी स्थिरता के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।

3. थ्वाइट्स ग्लेशियर को लेकर अक्टूबर 2026 में कौन-से नए अपडेट सामने आए?

प्रश्न: NASA के नए शोध ने क्या बताया?

उत्तर: NASA ने 20 अक्टूबर 2026 को एक नए मॉडल अध्ययन पर जानकारी प्रकाशित की। शोधकर्ताओं ने ग्लेशियर के उस संक्रमण क्षेत्र को अधिक वास्तविक ढंग से मॉडल किया, जहां बर्फ जमीन से जुड़ी होने की स्थिति से तैरती बर्फ में बदलती है। इस क्षेत्र में समुद्री पानी की घुसपैठ और ज्वार के साथ होने वाली हलचल बर्फ की अस्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

Nature Communications में 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अध्ययन के एक मॉडल अनुमान में थ्वाइट्स ग्लेशियर से 2100 तक वैश्विक औसत समुद्र-स्तर में लगभग 30 ± 6 मिलीमीटर की वृद्धि का अनुमान सामने आया। यह कुछ पूर्व अनुमानों से लगभग दोगुना था और इस मॉडल की मान्यताओं पर आधारित है—इसे सभी वैज्ञानिक मॉडलों की सहमति या निश्चित भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए।

प्रश्न: ब्रिटिश वैज्ञानिकों के ताजा शोध में क्या पता चला?

उत्तर: 13 अक्टूबर 2026 को ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (BAS) ने बताया कि तीन कंप्यूटर मॉडलों में समुद्र के नीचे से होने वाले पिघलाव को पूरी तरह बंद मानने के बावजूद थ्वाइट्स ग्लेशियर 150 वर्षों के सिमुलेशन में बर्फ खोता रहा। इससे संकेत मिलता है कि पहले हो चुके बदलाव भविष्य में भी बर्फ के नुकसान को जारी रख सकते हैं। यह मॉडल का परिणाम है, ग्लेशियर के वास्तविक भविष्य की सटीक समय-सारणी नहीं।

4. यदि थ्वाइट्स ग्लेशियर ढह गया तो समुद्र-स्तर कितना बढ़ सकता है?

प्रश्न: क्या इसके पिघलने से दुनिया के सभी तटीय शहर डूब जाएंगे?

उत्तर: नहीं, ऐसा निष्कर्ष निकालना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार, थ्वाइट्स ग्लेशियर की पूरी बर्फ का नुकसान लंबे समय में वैश्विक समुद्र-स्तर को लगभग 65 सेंटीमीटर बढ़ा सकता है। इसके पीछे की पश्चिमी अंटार्कटिक बर्फ की चादर में अतिरिक्त अस्थिरता आने पर प्रभाव इससे भी अधिक हो सकता है।

समुद्र-स्तर में वृद्धि का प्रभाव हर जगह समान नहीं होगा। स्थानीय भूगोल, भूमि का धंसना या उठना, ज्वार, तूफानी लहरें और तटीय सुरक्षा व्यवस्था यह निर्धारित करते हैं कि किसी क्षेत्र में बाढ़ का खतरा कितना बढ़ेगा।

5. थ्वाइट्स ग्लेशियर पर वैज्ञानिक शोध कैसे कर रहे हैं?

प्रश्न: वैज्ञानिक इस दुर्गम ग्लेशियर के नीचे क्या खोज रहे हैं?

उत्तर: वैज्ञानिक उपग्रहों, बर्फ की मोटाई मापने वाले उपकरणों, समुद्री सेंसरों, बर्फ में ड्रिलिंग और कंप्यूटर मॉडलों का उपयोग करते हैं। इनसे ग्लेशियर की गति, पिघलाव, समुद्र के तापमान और नीचे की भू-आकृति को समझने में मदद मिलती है।

फरवरी 2026 में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे और दक्षिण कोरिया के KOPRI से जुड़े वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर के मुख्य, तेजी से बहने वाले हिस्से के नीचे उपकरण लगाने का अभियान चलाया। टीम ने लगभग एक किलोमीटर मोटी बर्फ में गर्म पानी से छेद किया और उपकरण तैनात किए। अभियान में उपकरणों को लेकर कठिनाइयां भी आईं, लेकिन उनसे ग्लेशियर के नीचे की अशांत समुद्री परिस्थितियों और अपेक्षाकृत गर्म पानी के बारे में महत्वपूर्ण माप प्राप्त हुए।

6. थ्वाइट्स ग्लेशियर पर किन देशों के वैज्ञानिक काम कर रहे हैं?

उत्तर: International Thwaites Glacier Collaboration (ITGC) एक प्रमुख ब्रिटेन-अमेरिका संयुक्त शोध कार्यक्रम है, जो 2018 में शुरू हुआ। इसमें ब्रिटेन और अमेरिका के साथ दक्षिण कोरिया, जर्मनी, स्वीडन और अन्य देशों के वैज्ञानिकों ने योगदान दिया है। इसका उद्देश्य ग्लेशियर के पीछे हटने, बर्फ के नुकसान और समुद्र-स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव को बेहतर समझना है।

BAS के अनुसार, इस सहयोगी कार्यक्रम का निर्धारित समापन दिसंबर 2026 में है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि थ्वाइट्स ग्लेशियर पर वैज्ञानिक निगरानी या शोध भी समाप्त हो जाएगा।

7. थ्वाइट्स ग्लेशियर से जुड़े प्रमुख तथ्य क्या हैं?
विषयउपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी
नामThwaites Glacier
लोकप्रिय नामDoomsday Glacier
भौगोलिक क्षेत्रपश्चिमी अंटार्कटिका
निकटवर्ती समुद्री क्षेत्रअमुंडसेन सागर
प्रमुख खतरासमुद्री पानी से निचली बर्फ का पिघलना और ग्लेशियर का पीछे हटना
पूरा बर्फ नुकसान होने पर संभावित समुद्र-स्तर प्रभावलगभग 65 सेंटीमीटर, लंबे समय में
2026 का नया NASA अपडेटबेहतर मॉडलिंग से कुछ अनुमानों में समुद्र-स्तर योगदान पहले के अनुमानों से लगभग दोगुना
2026 का BAS शोधसमुद्री पिघलाव को मॉडल से हटाने पर भी 150-वर्षीय सिमुलेशन में बर्फ का नुकसान जारी रहा
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शोध कार्यक्रमInternational Thwaites Glacier Collaboration (ITGC)
ITGC की शुरुआत2018
ITGC का निर्धारित समापनदिसंबर 2026

ध्यान दें: 65 सेंटीमीटर ग्लेशियर के पूर्ण बर्फ नुकसान से जुड़ा दीर्घकालीन अनुमान है। वहीं, 30 ± 6 मिलीमीटर का आंकड़ा 2026 के एक विशिष्ट मॉडल अध्ययन में 2100 तक के योगदान का अनुमान है। दोनों आंकड़े अलग-अलग परिस्थितियों और समय-सीमाओं का वर्णन करते हैं।

Summary (निष्कर्ष)

थ्वाइट्स ग्लेशियर को “डूम्सडे ग्लेशियर” इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसका पीछे हटना वैश्विक समुद्र-स्तर और पश्चिमी अंटार्कटिका की बर्फ की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। अक्टूबर 2026 के नए शोध बताते हैं कि इसके भविष्य का अनुमान लगाने के लिए ग्लेशियर के नीचे समुद्री पानी की गतिविधियों और जमीन से जुड़ी बर्फ के संक्रमण क्षेत्र को बेहतर समझना आवश्यक है।

हालांकि, ग्लेशियर का निकट भविष्य में पूरी तरह ढहना निश्चित नहीं है। वैज्ञानिक निगरानी, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और तटीय क्षेत्रों की बेहतर योजना भविष्य के जोखिमों को समझने और उनसे निपटने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

15 महत्वपूर्ण FAQs

1. थ्वाइट्स ग्लेशियर क्या है?
यह पश्चिमी अंटार्कटिका का विशाल ग्लेशियर है, जो बर्फ को अमुंडसेन सागर की ओर पहुंचाता है।

2. इसे डूम्सडे ग्लेशियर क्यों कहते हैं?
क्योंकि इसका संभावित बर्फ नुकसान समुद्र-स्तर बढ़ा सकता है और आसपास की बर्फ की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

3. थ्वाइट्स ग्लेशियर कहां स्थित है?
यह पश्चिमी अंटार्कटिका के अमुंडसेन सागर क्षेत्र में स्थित है।

4. क्या थ्वाइट्स ग्लेशियर 2026 में ढह गया है?
नहीं। 2026 के शोध इसके भविष्य के जोखिमों और बर्फ के नुकसान के अनुमानों से संबंधित हैं; ये पूर्ण पतन की खबर नहीं हैं।

5. इसके पूरी तरह पिघलने से समुद्र-स्तर कितना बढ़ सकता है?
इसके पूरे बर्फ नुकसान से लंबे समय में वैश्विक समुद्र-स्तर लगभग 65 सेंटीमीटर बढ़ सकता है।

6. क्या इससे भारत को खतरा हो सकता है?
समुद्र-स्तर में वैश्विक वृद्धि भारत सहित दुनिया के तटीय क्षेत्रों में बाढ़, कटाव और खारे पानी के प्रवेश के जोखिम बढ़ा सकती है। वास्तविक प्रभाव स्थान के अनुसार अलग होगा।

7. NASA के अक्टूबर 2026 के शोध की मुख्य बात क्या है?
बेहतर मॉडलिंग से पता चला कि ग्लेशियर के जमीन से जुड़ने और तैरने वाले संक्रमण क्षेत्र की प्रक्रियाएं समुद्र-स्तर के अनुमानों को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकती हैं।

8. 30 ± 6 मिलीमीटर का अनुमान क्या दर्शाता है?
यह एक विशेष मॉडल अध्ययन में 2100 तक थ्वाइट्स ग्लेशियर से होने वाली संभावित वैश्विक औसत समुद्र-स्तर वृद्धि का अनुमान है, न कि सभी मॉडलों का अंतिम निष्कर्ष।

9. क्या समुद्र का गर्म पानी ग्लेशियर को पिघलाता है?
हां। अपेक्षाकृत गर्म समुद्री पानी ग्लेशियर की निचली बर्फ और तैरती बर्फ की शेल्फ को पिघला सकता है।

FAQ

10. क्या ग्लेशियर का पूरा पतन निकट भविष्य में निश्चित है?
नहीं। वैज्ञानिक शोध गंभीर दीर्घकालीन जोखिम दिखाते हैं, लेकिन पूर्ण पतन की सटीक तारीख निश्चित नहीं है।

11. वैज्ञानिक थ्वाइट्स ग्लेशियर का अध्ययन कैसे करते हैं?
उपग्रहों, समुद्री सेंसरों, बर्फ में ड्रिलिंग, क्षेत्रीय माप और कंप्यूटर मॉडलों के माध्यम से।

12. थ्वाइट्स ग्लेशियर पर कौन-से देश शोध कर रहे हैं?
ब्रिटेन और अमेरिका प्रमुख भागीदार हैं। दक्षिण कोरिया, जर्मनी, स्वीडन और

अन्य देशों के वैज्ञानिक भी अंतरराष्ट्रीय शोध में योगदान देते हैं।

13. ITGC क्या है?
International Thwaites Glacier Collaboration एक अंतरराष्ट्रीय शोध कार्यक्रम है,

जो 2018 में शुरू हुआ और जिसका निर्धारित समापन दिसंबर 2026 है।

14. क्या थ्वाइट्स ग्लेशियर के पिघलने से सभी तटीय शहर डूब जाएंगे?
नहीं। खतरा स्थानीय ऊंचाई, भूगोल, तटीय सुरक्षा, तूफानों और समुद्र-स्तर वृद्धि की मात्रा पर निर्भर करता है।

15. थ्वाइट्स ग्लेशियर का अध्ययन क्यों जरूरी है?
इससे भविष्य में समुद्र-स्तर वृद्धि का बेहतर अनुमान लगाने, तटीय समुदायों की

योजना बनाने और जलवायु परिवर्तन के जोखिम समझने में मदद मिलती है।

References (संदर्भ)
  1. NASA Science — NASA Study Refines Projections for Thwaites Glacier, 20 अक्टूबर 2026: https://science.nasa.gov/blogs/science-news/2026/10/20/nasa-refines-thwaites-glacier-projections/
  2. Nature Communications — Sea-level contribution from Thwaites Glacier doubles in an observation-constrained ice-sheet model, 12 अक्टूबर 2026: https://www.nature.com/articles/s41467-026-77976-1
  3. British Antarctic Survey — Thwaites Glacier will keep losing ice even if oceans cool, 13 अक्टूबर 2026: https://www.bas.ac.uk/news/thwaites-glacier-will-keep-losing-ice-even-if-oceans-cool/
  4. British Antarctic Survey — Update from Thwaites Glacier: when science doesn’t go your way, 4 फरवरी 2026: https://www.bas.ac.uk/news/update-from-thwaites-glacier-when-science-doesnt-go-your-way/
  5. International Thwaites Glacier Collaboration — निष्कर्ष और वैज्ञानिक आकलन: https://thwaitesglacier.org/findings
Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख वैज्ञानिक शोध और संस्थागत स्रोतों पर आधारित सामान्य जानकारी

के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ग्लेशियरों के भविष्य और समुद्र-स्तर

वृद्धि के आंकड़े मॉडल, जलवायु परिस्थितियों और नई टिप्पणियों के अनुसार बदल सकते हैं।

किसी एक शोध के अनुमान को निश्चित भविष्यवाणी न माना जाए।

नवीनतम निष्कर्षों के लिए संबंधित वैज्ञानिक संस्थानों और शोध-पत्रों को देखें।

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