Description
देश में वैसे तो कई राज्य हैं जो जलसंकट को हर वर्ष भोगते हैं लेकिन बुंदेलखंड का दर्द कुछ अलग है, ये क्षेत्र जो कभी अपने पानी, तालाबों के लिए पहुंचाना जाता था अब समय ने इसके चेहरे पर सूखी लकीर खींच दी है। बुंदेलखंड पानीदार से सूखा और प्यासा आखिर कैसे हो गया और इसके कारण क्या थे उन्हें समझना बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन एक और प्रमुख बात है और वह यह कि बुंदेलखंड क्या राजनीति की बिसात पर हर बार और बेहद सहजता से पिट जाने वाला प्यादा बन चुका है जिसका उपयोग केवल चुनावों में जीत तक ही किया जाता है, हर चुनाव में बुंदेलखंड में बिसात पर प्यास ही रहती है, यहां के रहवासियों से पूछियेगा तब वे बताएंगे कि हर चुनाव में वे शब्दों के पानी से खूब लबरेज हो जाया करते हैं लेकिन चुनाव बीतते ही उनके भरोसे का पानी सूख जाता है, अब भरोसे में भी सूखे की तरह दरार पड़ने लगी है।





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