Description
दो प्राणी थे एक पुरुष और एक स्त्री। दोनों में बड़ा प्रेम था। इसी बालू के समन्दर में खो गए थे। पास में बस दो बूंद पानी ही रह गया था। पर पानी दोनों में से एक ने भी नहीं पीया। एक दूसरे को कहते कहते मर गए कि तू पी-तू पी। पचास वर्ष पहले बनी एक फिल्म का आरंभ कुछ इस तरह हुआ था, इसलिए समझाना चाहता हूं तब चेतना भी थी और पानी भी था तभी हमारे आज को संवारने के लिए एक नायाब फिल्म ने आकार ले लिया था। यहां बात करना चाहता हूं कि एक फिल्म की। हम लगभग पचास सालों में पानी को लेकर कितने गहन हो पाए, हमने धरती के ताप को कितना समझा, हमने संकट को कहां तक रोकने के प्रयास किए…। वर्ष 1971 में ख्वाजा अहमद अब्बास के निर्देशन में एक फिल्म बनी थी ‘दो बूंद पानी’ नया संसार बैनर के तहत यह फिल्म बनाई थी। समय मिले तो उस फिल्म को अवश्य देखिएगा कि हमारे आज को उस पुरानी पीढ़ी ने कल ही कितना बखूबी पढ़ लिया था।





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